वाराणसी का स्वाद, स्विगी के साथ” पहल शुरू, अब घाटों पर मिलेगा बनारस के मशहूर व्यंजनों का स्वाद

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वाराणसी नगर निगम भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और स्विगी की साझेदारी में “वाराणसी का स्वाद, स्विगी के साथ” पहल का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्घाटन 12 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के स्टाम्प, न्यायालय शुल्क एवं पंजीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा वाराणसी उत्तर के विधायक रवींद्र जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस पहल का उद्देश्य वाराणसी की समृद्ध खाद्य विरासत को देश-विदेश के पर्यटकों और स्थानीय लोगों तक पहुंचाना है। इसके तहत शहर के 12 प्रसिद्ध भोजनालयों के लोकप्रिय व्यंजनों को घाटों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें काशी चाट भंडार, चाची की प्रसिद्ध कचौरी, लक्ष्मी चाय, पहलवान लस्सी, गामा पान भंडार, पाठक जी ठंडाई वाला, नीलू कचौरी, टेस्ट किंग, नेताजी पान भंडार, गौरी शंकर कचौरी वाला, पॉपुलर बाटी चोखा और बनारसी पान मंदिर (लक्सा) शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान इन प्रतिष्ठित भोजनालयों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया तथा पर्यटन विभाग की ओर से उन्हें विरासत, गुणवत्ता और गौरव का प्रतीक प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। स्विगी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार नमो घाट, अस्सी घाट और दशाश्वमेध घाट जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पारंपरिक शैली में डिजाइन किए गए विशेष ठेले लगाए जाएंगे। यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु बनारस के प्रसिद्ध व्यंजनों का आसानी से स्वाद ले सकेंगे।

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार ने कहा कि वाराणसी की खाद्य परंपराएं इसकी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस तरह की पहल स्थानीय विक्रेताओं और भोजनालयों को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ-साथ शहर की खाद्य विरासत को संरक्षित करने में भी मददगार साबित होगी।

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने के विजन को साकार करने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की “एक जिला, एक व्यंजन” योजना के तहत वाराणसी के पान, मलइयो, कचौड़ी, लस्सी और ठंडाई जैसे पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान मिल रही है।

स्विगी फूड मार्केटप्लेस के सीईओ रोहित कपूर ने कहा कि भोजन किसी भी शहर की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा होता है। यह पहल लाखों पर्यटकों को वाराणसी के प्रतिष्ठित व्यंजनों से जोड़ने और स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित होगी। इस पहल से वाराणसी की पाक विरासत को नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय खाद्य कारोबारियों के लिए नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।