“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अंतर्गत “सोमनाथ संकल्प महोत्सव”

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वाराणसी धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में सोमवार को आयोजित “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अंतर्गत “सोमनाथ संकल्प महोत्सव” सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चेतना का भव्य प्रतीक बनकर उभरा। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहभागिता करते हुए सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा के गौरव को नई दिशा देने का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय आत्मगौरव के पुनर्जागरण का शंखनाद है। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा सदियों से विश्व को मानवता, शांति और आध्यात्म का मार्ग दिखाती रही है, और आज देश पुनः अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में देश के प्राचीन धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्रों का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, अयोध्या धाम और सोमनाथ मंदिर जैसे तीर्थस्थल आज पुनः अपने प्राचीन वैभव को प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल विकास परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करने का राष्ट्रीय अभियान है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब कोई समाज अपनी संस्कृति, परंपरा और इतिहास पर गर्व करना सीख जाता है, तब उसका भविष्य स्वतः उज्ज्वल हो जाता है। भारत आज उसी आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की शक्ति ही भारत की सबसे बड़ी पहचान है और यही हमारी एकता का आधार भी है।


कार्यक्रम में उपस्थित संत-महात्माओं और धर्माचार्यों ने भी सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान और अटूट आस्था का प्रतीक है। अनेक आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद सनातन परंपरा ने अपनी शक्ति और अस्तित्व को बनाए रखा, जो भारतीय संस्कृति की जीवंतता को दर्शाता है।

इस दौरान कार्यक्रम स्थल पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न संगठनों के लोग उपस्थित रहे। मंच से वैदिक मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आध्यात्मिक संदेशों ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।